Sunday, May 20, 2012

लावारिस


न घर है
न माँ बाप मेरे
भाई बहिन भी नहीं  दिए भगवान् ने मुझे
अकेला हूँ इस दुनिया में
न किसी को मेरी चिंता है
न मेरी भूख की
कचरे में रहता हूँ
कचरे में ही मिला था दुनिया को
कोई वारिस नहीं है मेरा
लावारिस कहते हैं मुझे
क्या मै सच में
लावारिस ही हूँ
कभी कोई नहीं आएगा
जो मुझे गोद में बिठाएगा
प्यार  से लोरी सुनाएगा
मुझे भी चाहिए
एक घर
एक नाम
एक पहचान
मेरा कसूर है क्या
ये मेरा लावारिस होना
मत पुकारो
इस नाम से मुझे 


2 comments:

  1. सुन्दर भावपूर्ण प्रस्तुति...बहुत बहुत बधाई...

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    1. हार्दिक आभार .....प्रसन्न जी ...

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