Saturday, March 8, 2014

सफाई

 
ये हालत ये नज़ारा आप को किसी भी सड़क के किनारे देखने को मिल जायेगा ,गाँव में तो ऐसा दृश्य आम बात है ,सरकार ने हर जगह कचरे के लिए डिब्बे लगा रखे हैं लेकिन उनका इस्तेमाल करना शायद किसी को आता नहीं या थोडा सा भी कष्ट कौन करे ,जहाँ जगह देखि वहीँ कचरा फेंक दिया ,अपना घर साफ़ किया तो कचरा पडोसी के घर की साइड में लगा दिया ,क्या उससे आप का घर गन्दा नहीं लगता जब आप के घर कोई आये तो क्या उसकी नज़र सिर्फ आप के घर पर ही होगी ,क्या उसे वो कचरा नज़र नहीं आएगा
इसी तरह सडको पर पड़ा ये कचरा कितनी बिमाइयों को जन्म देता है ,देखने में जो बुर लगता है वो तो अलग बात है ,इस कचरे पर मक्खी मच्छर पैदा होते हैं जो बरसात में न जाने कितनी बिमारिय फैलाते हैं ,
हमारे यहाँ बच्चे के पैदा होने पर जितने टीके लगते हैं विदेशो में उससे आधे भी नहीं लगते ,क्यों....क्योकि वहां ऐसी गंदगी नहीं है
ये आप का देश है ,इसे आप साफ़ नहीं रखेंगे तो बीमारियाँ आप के ही दरवाज़े पर दस्तक देंगी

Sunday, August 19, 2012

धन्य है

वाह

सलाम है तुझे मेरे देश के वीर बहादुर

मेहनत और इस हालत में

मन भर आया

बस प्रणाम को आशीष के सिवा

मन में और कुछ न आया

जिस देश के ऐसे बच्चे होंगे

उस देश का सर सदा गर्व से ऊँचा होगा

हर इंसान के लिए मिसाल है तू

धन्य है तेरी जननी

धन्य है तू 

Wednesday, August 8, 2012

गरीब की खोली

घर

हम गरीबो को और क्या चाहिए 

बहुत है इतनी जगह जहाँ पांव फैला कर सो सकू 

महल भी तो बनना है सुबह मंत्री जी का 

अब न सोया तो काम कैसे करूँगा 

बस मंत्री जी इसे भी न तुडवा दे 

नहीं तो सड़क पर सो जाऊंगा 

नींद तो कांटो पर भी आ जाती है 

फिर ओरो को क्यों इतनी चीज़े चाहिए 

छोडो मुझे नहीं समझ आनेवाला ये सब 

गंवार हूँ गरीब हूँ 

मेहनत करके पेट भरना जनता हूँ 

और कुछ आता नहीं 

क्योकि पड़ा लिखा नहीं हूँ मै 

,माँ बाप भी तो गरीब थे  

शर्म किस बात की मेहनत करने में 

कोई चोरी थोड़ी करता हूँ 

बस ये खोली न तुडवा दे मंत्री जी 


Tuesday, August 7, 2012

गरीब की रोटी

रोटी
गरीब को रोटी चाहिए
साधन कोई हो न हो
जुगाड तो कर ही लेते हैं 
जुगाड
कमाया है पेट के किये
तो खाऊंगा भी
जगह कोई मिले न मिले
जुगाड तो कर ही लूँगा कोई
गरीब हूँ तो क्या
पेट तो मेरे पास भी है
दिल को मार सकता हूँ
पेट की सुन्नी पड़ती है मुझे 

Saturday, July 28, 2012

धागा

राखी

राखी आ गयी

मै कैसे खरीदूं

पैसे कहाँ से लाऊं

बहुत दिल करता है

तुम्हारी कलाई सजाने को

लेकिन गरीब बहन हूँ

इस धागे को राखी समझ लो

इसमें मेरा प्यार भरा है

दुआएं है तुम्हारे लिए

आशीष है तुम्हारी आयु को

इसे ठुकराना मत भाई

बहुत आस से लाइ हूँ

बांध लेना इसे कलाई पर

जानती हूँ तुम्हे राखी चाहिए

कोशिश करुँगी अगले वर्ष

हर बार यही सोचती हूँ

और हर बार धागा लेकर आ जाती हूँ 

Friday, July 6, 2012

इंसान

भगवान
बचपन में सुना था

पत्थर में भी भगवान होते हैं

आज देखा तो पता लगा

लोग पत्थर के हो गएँ हैं

अब मंदिर जाकर क्या करे

जब सब इंसान ही पत्थर के हो गएँ हैं


Sunday, July 1, 2012

पापा की बिटिया

बिटिया

पापा की बिटिया हूँ

आँखों का तारा हूँ

लेकिन पापा तो डरपोक हैं

मुझे देखते हैं

प्यार करते करते डर जाते हैं

वो नहीं बताते

मै समझ जाती हूँ

मै पापा की बिटिया हूँ

पूछा मैंने पापा से

क्यों डरते हो आप प्यार करते हुए

वो रो पड़े

अब मै डर गयी

बोले मेरी गुडिया

तुझे कैसे भेजूंगा डोली में

ये सोच कर डर जाता हूँ

मैंने पूछा पापा से

क्यों सामने वाली दीदी भी तो गयी हैं

पापा नहीं बता सके

दीदी के साथ क्या हुआ था ससुराल में

मुझे तो बहुत बाद में पता चला

तब से मै भी डर गयी

पापा से प्यार करते अब मै डर जाती हूँ

कैसे जाउंगी पापा को छोड़ के

अगर मुझे भी जला डाला तो

मै तो पापा की बिटिया हूँ

पापा कैसे सहेंगे

हे भगवन

ये सब बंद करवा दो न

सब बिटिया को प्यार दिला दो न

ससुराल में