Sunday, August 19, 2012
Wednesday, August 8, 2012
गरीब की खोली
Tuesday, August 7, 2012
Saturday, July 28, 2012
धागा
Friday, July 6, 2012
Sunday, July 1, 2012
पापा की बिटिया
Wednesday, May 30, 2012
तू बड़ी मत होना
मेरी बिटिया तू बड़ी मत होना
तुझे रोज़ सजाया करूंगी
जो कहेगी वो ला कर दूंगी
लेकिन तू बड़ी मत होना
बड़ी जालिम दुनिया है ये
तू तो फूल सी कोमल है
बहुत भोली है मेरी बिटिया
मेरे पास दहेज नही है
मेरे पास पैसे भी नहीं हैं
कैसे झेलेगी तू इन सब को
ये दहेज के भूखे भेड़िये हैं
ये निगल जाते हैं बहुओ को
इनको बस दहेज चाहिए
बहू नही तिजोरी चाहिए
मैं कहाँ से लाऊंगी इतना
तुझे बस किसी तरह पढ़ा दूंगी
पर दहेज कहाँ से लाऊंगी
नही नही तू बड़ी मत होना बिटिया
मैं झाड़ू कटका सब करूंगी
दिन रात मजदूरी करूंगी
तू जितना कहेगी मैं पढ़ाऊगी
पर दहेज कहाँ से लाऊंगी मैं
एक बार दे दूंगी तो आदत हो जाएगी
रोज रोज मांगेगे वो कुछ
शेर के मुंह खून नहीं लगाऊंगी
तू जो कहेगी वो बनाऊंगी
मेहनत से कभी जी नही चुराऊंगी
पर दहेज कहाँ से लाऊंगी मैं
नहीं शेर के मुँह खून नही लगाऊंगी
अपनी माँ का कहना मानना
कभी बड़ी मत होना बिटिया
मैं अनपड़ इन भेड़ियों से
लड़ नही पाऊंगी हार जाऊंगी
मैने सब सहा है दहेज का
तुझे सब सहते देख नहीं पाऊंगी
मौत से पहले मर जाऊंगी
तू जितना चाहे पढ़ना
बस बड़ी मत होना बिटिया
तुझे रोज़ सजाया करूंगी
जो कहेगी वो ला कर दूंगी
लेकिन तू बड़ी मत होना
बड़ी जालिम दुनिया है ये
तू तो फूल सी कोमल है
बहुत भोली है मेरी बिटिया
मेरे पास दहेज नही है
मेरे पास पैसे भी नहीं हैं
कैसे झेलेगी तू इन सब को
ये दहेज के भूखे भेड़िये हैं
ये निगल जाते हैं बहुओ को
इनको बस दहेज चाहिए
बहू नही तिजोरी चाहिए
मैं कहाँ से लाऊंगी इतना
तुझे बस किसी तरह पढ़ा दूंगी
पर दहेज कहाँ से लाऊंगी
नही नही तू बड़ी मत होना बिटिया
मैं झाड़ू कटका सब करूंगी
दिन रात मजदूरी करूंगी
तू जितना कहेगी मैं पढ़ाऊगी
पर दहेज कहाँ से लाऊंगी मैं
एक बार दे दूंगी तो आदत हो जाएगी
रोज रोज मांगेगे वो कुछ
शेर के मुंह खून नहीं लगाऊंगी
तू जो कहेगी वो बनाऊंगी
मेहनत से कभी जी नही चुराऊंगी
पर दहेज कहाँ से लाऊंगी मैं
नहीं शेर के मुँह खून नही लगाऊंगी
अपनी माँ का कहना मानना
कभी बड़ी मत होना बिटिया
मैं अनपड़ इन भेड़ियों से
लड़ नही पाऊंगी हार जाऊंगी
मैने सब सहा है दहेज का
तुझे सब सहते देख नहीं पाऊंगी
मौत से पहले मर जाऊंगी
तू जितना चाहे पढ़ना
बस बड़ी मत होना बिटिया
Monday, May 28, 2012
मंजूरी चाहीऐ
मैने भी पढ़ना है
समय नहीं मांगती
बस मंजूरी चाहीऐ
काम पर भी आऊंगी
झाड़ू पोछा भी करूंगी
बस मंजूरी दे दो मुझे
मैने भी पढ़ना है
पढ़ूंगी तो बिटिया को
पढ़ा सकूंगी मैं
नही देखा जाता मुझसे
झाड़ू कटका करना उसका
बहुत सहा मैने जिंदगी में
मेरी बिटिया न सहे वो सब
मंजूरी दे दो मुझे बस
मैने भी पढ़ना है
अब अंगूठा नही लगाना
सही करना है मुझे भी
अब कोई खेत न छीने
अब पढ़ कर सही करना है
मंजूरी दे दो मुझे बस
मैने भी पढ़ना है
पढ़ कर खेत वापस लेने हैं
घर छुड़वाना है अपना
बच्चो को छत देनी है
उन्हे पढ़ाई का महत्व
सब समझाना है
पढ़ूंगी तो पति को लाऊंगी
उन्हे परिवार का महत्व
समझा पाऊंगी मैं
बच्चो को भी कुछ बनाना है
पढ़ाई का महत्व समझाना है
बिटिया पढ़ी लिखी होगी
तभी तो उसका भविष्य
सब मुझे ही संवारना है
मंजूरी दे दो बस
मुझे भी पढ़ना है
राजू मोनू को देखा नही जाता
छोटे छोटे हाथो से मज़दूरी करते
मुझे उन्हे भी समझाना है
पढ़ाई का महत्व बताना है
क्या कर पाऊंगी मैं सब
पर मुझे करना ही है
मुझे पढ़ना ही है
अभी सो जाती हूँ
सुबह काम पर भी जाना है
घर का काम करके
रात को पढ़ना भी है
मंजूरी दे दो मुझे बस
मेरी उमर को न देखो
मेरी लगन को पहचानो
समय नहीं मांगती
बस मंजूरी चाहीऐ
काम पर भी आऊंगी
झाड़ू पोछा भी करूंगी
बस मंजूरी दे दो मुझे
मैने भी पढ़ना है
पढ़ूंगी तो बिटिया को
पढ़ा सकूंगी मैं
नही देखा जाता मुझसे
झाड़ू कटका करना उसका
बहुत सहा मैने जिंदगी में
मेरी बिटिया न सहे वो सब
मंजूरी दे दो मुझे बस
मैने भी पढ़ना है
अब अंगूठा नही लगाना
सही करना है मुझे भी
अब कोई खेत न छीने
अब पढ़ कर सही करना है
मंजूरी दे दो मुझे बस
मैने भी पढ़ना है
पढ़ कर खेत वापस लेने हैं
घर छुड़वाना है अपना
बच्चो को छत देनी है
उन्हे पढ़ाई का महत्व
सब समझाना है
पढ़ूंगी तो पति को लाऊंगी
उन्हे परिवार का महत्व
समझा पाऊंगी मैं
बच्चो को भी कुछ बनाना है
पढ़ाई का महत्व समझाना है
बिटिया पढ़ी लिखी होगी
तभी तो उसका भविष्य
सब मुझे ही संवारना है
मंजूरी दे दो बस
मुझे भी पढ़ना है
राजू मोनू को देखा नही जाता
छोटे छोटे हाथो से मज़दूरी करते
मुझे उन्हे भी समझाना है
पढ़ाई का महत्व बताना है
क्या कर पाऊंगी मैं सब
पर मुझे करना ही है
मुझे पढ़ना ही है
अभी सो जाती हूँ
सुबह काम पर भी जाना है
घर का काम करके
रात को पढ़ना भी है
मंजूरी दे दो मुझे बस
मेरी उमर को न देखो
मेरी लगन को पहचानो
Saturday, May 26, 2012
Sunday, May 20, 2012
लावारिस
Saturday, May 19, 2012
आशीष
क्या लिखूं समझ नहीं आ रहा कलम हाथों में थम सी गयी है ,एक माँ अपने जिगर के टुकड़ो के साथ इस हालत में ,शायद शब्द भी ख़तम हो गए हैं मेरे
ये नन्हे बच्चे जिन्हें जिन्दगी का अर्थ मालूम नहीं वो जिन्दगी से झुझ रहे हैं
ये बेबस माँ तस्वीर खिंचवाने के लिए भी इस लिए मानी की उन पैसो से अपने बच्चो को एक वक़्त का खाना दे सके
ये टूटा सा घर क्या इन्हें आंधी तूफ़ान में बचाएगा या अपने साथ बहा ले जायेगा
आज जिन्दगी इतनी तेज दौड़ रही हैजो इन लोगो को मालूम भी नहीं शायद
इन्हें तो रोटी और कपडा भी नसीब नहीं हो रहा ...क्यों ...मन में ये सवाल उठता है ...
क्या हम इनके लिए कुछ नहीं कर सकते
क्या ये इंसान नहीं हैं... क्या इन्हें जीने का हक़ नहीं है...
क्या इन बच्चो को स्कूल नहीं जाना चाहिए....
ऐसे बहुत से सवाल मन को कचोटते हैं ,भगवान् ने तो सब को एक सा बनाया है फिर ये दुनिया क्यों भेद भाव करती है ...
कब जागेंगे सब गहरी नींद से और इन मासूमो का भविष्य उज्जवल होगा
क्या ये मात्र सपना ही बन कर रह जायेगा
क्या इन्हें कभी रोटी और कपडा कभी नसीब नहीं होगा
हम लोग दान पुण्ये करते हैं ....इनको क्यों नहीं देते ...,क्या इन लोगो को देने पर भगवान् खुश नहीं होंगे
इनसे बड कर और कौन होगा जिसका आशीष मिलेगा .......और जो सार्थक भी होगा ....क्या हमे ऐसा आशीष नहीं चाहिए .....
ये नन्हे बच्चे जिन्हें जिन्दगी का अर्थ मालूम नहीं वो जिन्दगी से झुझ रहे हैं
ये बेबस माँ तस्वीर खिंचवाने के लिए भी इस लिए मानी की उन पैसो से अपने बच्चो को एक वक़्त का खाना दे सके
ये टूटा सा घर क्या इन्हें आंधी तूफ़ान में बचाएगा या अपने साथ बहा ले जायेगा
आज जिन्दगी इतनी तेज दौड़ रही हैजो इन लोगो को मालूम भी नहीं शायद
इन्हें तो रोटी और कपडा भी नसीब नहीं हो रहा ...क्यों ...मन में ये सवाल उठता है ...
क्या हम इनके लिए कुछ नहीं कर सकते
क्या ये इंसान नहीं हैं... क्या इन्हें जीने का हक़ नहीं है...
क्या इन बच्चो को स्कूल नहीं जाना चाहिए....
ऐसे बहुत से सवाल मन को कचोटते हैं ,भगवान् ने तो सब को एक सा बनाया है फिर ये दुनिया क्यों भेद भाव करती है ...
कब जागेंगे सब गहरी नींद से और इन मासूमो का भविष्य उज्जवल होगा
क्या ये मात्र सपना ही बन कर रह जायेगा
क्या इन्हें कभी रोटी और कपडा कभी नसीब नहीं होगा
हम लोग दान पुण्ये करते हैं ....इनको क्यों नहीं देते ...,क्या इन लोगो को देने पर भगवान् खुश नहीं होंगे
इनसे बड कर और कौन होगा जिसका आशीष मिलेगा .......और जो सार्थक भी होगा ....क्या हमे ऐसा आशीष नहीं चाहिए .....
Thursday, May 17, 2012
तिरंगे का मुल्य
क्या ये बच्चा देश के प्रति कुछ जनता होगा जो इतने सरे तिरंगे हाथ में लेकर खड़ा है .
कदापि नहीं उसे तो बस इतना पता है की इस तिरंगो को बेच कर उसे पैसे मिलेंगे
सलाम करता हुआ जबरदस्ती से मुसुकुरा रहा ये बच्चा क्या किसी की आँखों का नूर नहीं
उसे तो बस इतना मालूम होगा की इन तिरंगो को बेच कर उसे रोटी मिलेगी ,क्या हमारा देश
एक रोटी के कारन बिक रहा है वो भी इन मासूम बच्चो के हाथो ,ये हमारे कल के जवान हैं
अगर बच्चे की ये हालत है तो जवान कैसा होगा .......
कैसा होगा हमारे देश का आनेवाला कल .इस बच्चे को स्कूल जाना चाहिए ,लेकिन शायद
उसके माँ बाप के पास पैसे नहीं हैं ,उसे कैसे पता चलेगा तिरंगे का मूल्य ,जो कार के अंदर बैठे हैं
उन्होंने उसकी हालत देख कर कार की खिड़की खोलना भी गवारा नहीं किया ,
कैसे जागेगा ये देश और देशवासी .......काश कोई इन मासूमो के बारे में भी सोचता ......भारत ....महँ
कदापि नहीं उसे तो बस इतना पता है की इस तिरंगो को बेच कर उसे पैसे मिलेंगे
सलाम करता हुआ जबरदस्ती से मुसुकुरा रहा ये बच्चा क्या किसी की आँखों का नूर नहीं
उसे तो बस इतना मालूम होगा की इन तिरंगो को बेच कर उसे रोटी मिलेगी ,क्या हमारा देश
एक रोटी के कारन बिक रहा है वो भी इन मासूम बच्चो के हाथो ,ये हमारे कल के जवान हैं
अगर बच्चे की ये हालत है तो जवान कैसा होगा .......
कैसा होगा हमारे देश का आनेवाला कल .इस बच्चे को स्कूल जाना चाहिए ,लेकिन शायद
उसके माँ बाप के पास पैसे नहीं हैं ,उसे कैसे पता चलेगा तिरंगे का मूल्य ,जो कार के अंदर बैठे हैं
उन्होंने उसकी हालत देख कर कार की खिड़की खोलना भी गवारा नहीं किया ,
कैसे जागेगा ये देश और देशवासी .......काश कोई इन मासूमो के बारे में भी सोचता ......भारत ....महँ
गरीब की हालत
आज के हर गरीब की यही हालत है भूख और इच्छाओं का भोझ सर पर है
और हाथों में खाली डिब्बा ,क्योकि नल में पानी नहीं है और जेब में पैसे नहीं
आज का गरीब दिनों दिन और गरीब हो रहा है और
अमीर और अमीर .....
क्यों ......
इनके बारे में बाते तो सब करते हैं बढ चढ़ कर
लेकिन करता कोई कुछ नहीं
क्या इनमे इछाये नहीं हैं
क्या इनके बच्चो का दिल नहीं करता ये सब खाने को
इनकी ऐसी तस्वीरे बना कर बस सब हंस सकते हैं
कोई अपने बच्चो को नहीं समझाता इनके बारे में
दुःख होता है रोज़ हर जगह इनका अपमान देख कर
वैसे सब नारे लगाते हैं भारत महँ के और कार में बैठ कर
इन पर हँसते हुए चले जाते हैं
ज्यादा हुआ तो किसी पार्टी को कुसूरवार तेहरा दिया
बस हो गया देश के प्रति फ़र्ज़ पूरा ........वाह रे मेरे भारत
..........महान
और हाथों में खाली डिब्बा ,क्योकि नल में पानी नहीं है और जेब में पैसे नहीं
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गरीब की हालत |
अमीर और अमीर .....
क्यों ......
इनके बारे में बाते तो सब करते हैं बढ चढ़ कर
लेकिन करता कोई कुछ नहीं
क्या इनमे इछाये नहीं हैं
क्या इनके बच्चो का दिल नहीं करता ये सब खाने को
इनकी ऐसी तस्वीरे बना कर बस सब हंस सकते हैं
कोई अपने बच्चो को नहीं समझाता इनके बारे में
दुःख होता है रोज़ हर जगह इनका अपमान देख कर
वैसे सब नारे लगाते हैं भारत महँ के और कार में बैठ कर
इन पर हँसते हुए चले जाते हैं
ज्यादा हुआ तो किसी पार्टी को कुसूरवार तेहरा दिया
बस हो गया देश के प्रति फ़र्ज़ पूरा ........वाह रे मेरे भारत
..........महान
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